Explainer: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सदियों पहले से चल रहे तनाव के बीच शुक्रवार की दरमियानी रात दोनों देशों के बीच भीषण जंग शुरू हो गई है। पाकिस्तान की सेना ने अफ़ग़ानिस्तान के काबूल, कंधार और पक्तिया सहित कई इलाकों में एयर स्ट्राइक की, जिसके बाद अफगानिस्तान ने भी रात को ही पाकिस्तान की सीमा चौकियों पर ताबड़तोड़ हमले किए। अफगानिस्तान सत्तारूढ़ तालिबानियों के इस हमले पर तीखी टिप्पणी करते हुए रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा, हमारे सब्र का प्याला भर गया है। अब हमारे और तुम्हारे बीच खुली जंग है। अब यह दमा दम मस्त कलंदर होगा। पाकिस्तान की सेना समुद्र पार से नहीं आई है। हम आपके पड़ोसी हैं; हम आपके अंदर और बाहर की बातें जानते हैं।
दोनों देशों के बीच जंग से चिंता में दुनिया
हमले के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा, हम अपने मुल्क के क्षेत्र की एकता और शांति से किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं करेंगे। उनके बयान का तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने ज़ोरदार पलटवार करने की चेतावनी दी। अफगान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 26 फरवरी की रात को पाकिस्तानी सेना ने अफगानी क्षेत्र में बड़े हमले किए जिनमें महिलाओं और बच्चों की जान गई है। हमने बदले की कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे धकेल दिया है। दोनों मुल्कों के बीच शुरू हुए संघर्ष से कतर-मध्यस्थता वाला युद्धविराम खतरे में है और साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।

पाक का ऑपरेशन 'गजब लिल हक'
पाकिस्तान और अफगानिस्तान किसी बड़ी जंग के मुहाने पर खड़े हुए हैं। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल सहित कंधार और पक्तिका में बड़े हवाई हमले किए हैं और इसे 'ऑपरेशन गजब-लिल-हक' नाम दिया है, जिसमें अब तक 133 अफगान तालिबान लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है। "ग़ज़ब लिल हक़" एक अरबी शब्द है जिसका मतलब है 'सच के लिए गुस्सा' या 'न्याय के लिए प्रकोप'। ग़ज़ब का अर्थ है गुस्सा या प्रकोप, लिल का अर्थ है के लिए, और हक़ का अर्थ है सच, यानी न्याय या जो सही है।
वहीं अफगानिस्तान ने इस हमले में 50 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने सोशल मीडिया पर अफगानिस्तान से खुले युद्ध की घोषणा की। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालीबान सरकार तहरीक-ए-तालीबान पाकिस्तान को पनाह दे रही है।

डूरंड लाइन बनी और बन गए दुश्मन
1893 में खींची गई थी डूरंड रेखा जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद की सबसे बड़ी वजह है, तब से दोनों देश इसे लेकर लड़ रहे हैं। 2,640 किलोमीटर लंबी डूरंड लाइन 12 नवंबर 1893 को ब्रिटिश इंडिया के विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड और अफगानिस्तान के अमीर अब्दुल रहमान खान के बीच समझौता के तहत खींची गई थी। इस लाइन के खींचने का मुख्य मकसद ब्रिटिश साम्राज्य समय के भारत और अफगानिस्तान के बीच बॉर्डर को तय करना था। यह लाइन ब्रिटिश साम्राज्य के ग्रेट गेम का हिस्सा था, जिसमें वह रूस को भारत में आने से रोकने के लिए अफगानिस्तान को बफर स्टेट बनाना चाहते थे।
अफगानिस्तान डूरंड रेखा को नहीं मानता है, उसका तर्क है कि यह लाइन पश्तून और बलूच कबीलों को दो हिस्सों में बांट देती है। अफगानों के मुताबिक अंग्रेजों ने डूरंड लाइन का यह समझौता जबरन करवाया है। पाकिस्तान ने साल 2017 में इस पूरी लाइन पर कांटेदार तार लगा दिए थे, फिर जब साल 2021 में तालिबान ने सत्ता संभाली तो सत्ता में आते ही इसका विरोध करना शुरू कर दिया। डूरंड लाइन में कई जगह को जीरो पॉइंट कहा जाता है, जिसमें चमन बॉर्डर और तोरखम बॉर्डर जैसे इलाके शामिल हैं। यहां दोनों देशों के सुरक्षा बल आमने-सामने खड़े रहते हैं।

जंग की बड़ी वजह है तहरीक ए तालिबान
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग की दूसरी सबसे बड़ी वजह तहरीक-ए-तालीबान है। तहरीक ए तालिबान एक आतंकी संगठन है। साल 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के बाद जब अमेरिका ने वॉर ऑन टेरर की शुरुआत की और अफगानिस्तान पर हमला किया तो उससे बचने के लिए कई आतंकी अफगानिस्तान को छोड़कर पाकिस्तान के कबायली इलाकों में आकर छुप गए थे। पाकिस्तान ने इस युद्ध में अमेरिका का साथ दिया और आतंकियों पर एक्शन लिया था जिसकी वजह से खैबर पख्तूनख्वा के स्थानीय पश्तून भड़क गए थे।
इसके बाद 2007 में पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन साइलेंस चलाया और लाल मस्जिद में बड़े मिलिट्री ऑपरेशन में मौलाना अब्दुल रशीद गाजी को मार गिराया। उसका बदला लेने के लिए कई आतंकी संगठनों ने बैतुल्लाह महसूद के नेतृत्व में तहरीक-ए- तालिबान पाकिस्तान का गठन किया जिसका मकसद पाकिस्तान की सरकार को उखाड़ फेंकना था।

कितनी पुरानी है पाकिस्तान और अफगानिस्तान की अदावत